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1000+ Two Line Shayari {Short Shayari}


यूँ ना छोड़ जिंदगी की किताब को खुला,
बेवक्त की हवा ना जाने कौन सा पन्ना पलट दे।

सिर्फ़ दो ही गवाह थे मेरी वफ़ा के, एक वक्त,
और एक वो, एक गुज़र गया और एक मुकर गया।

दोस्तो से बडी कोई दौलत नही,
इस मामले में मुझ से बड़ा कोई अमीर नहीं।

ज़िन्दगी है चार दिन की, कुछ भी न गिला कीजिये,
दवा, ज़हर, जाम, इश्क, जो मिले मज़ा लीजिये।

रुबरु मिलने का मौका नही मिलता,
इसीलिए, शब्दो से नमन कर लेता हूँ अपनो को।

माना कि दो किनारो का कही संगम नही होता,
मगर साथ चलना भी तो कम नहीं होता।

खुदा न बदल सका आदमी को आज भी यारों,
और अब तक आदमी ने सैकड़ो खुदा बदल डाले।

जब ख्वाबों के रास्ते जरूरतों की और मुड जाते है,
तब हमें असल जिंदगी के मायने समझ में आते है।

जिनके उपर जिम्मेदारीयों का बोझ होता है,
उनको रुठने और टूटने का हक़ नही होता।

लगाई तो थी आग उसकी तस्वीर में रात को,
सुबह देखा तो मेरा दिल छालों से भरा पड़ा था।

आओ आज महफ़िल सजाते हैं,
तुम्हें लिखकर, तुम्हें ही सुनाते हैं।

मुझसे बिछड़े अरसा बीता,
जाने अब वो किससे लड़ता होगा।

कोई कितना ही खुश-मिज़ाज क्यों न हो
रुला देती है किसी की कमी कभी-कभी।

नींद चुराने वाले पूछते हैं सोते क्यू नही,
इतनी ही फिक्र है तो फिर हमारे होते क्यू नही।

बच्चों को पैरों पर, खड़ा करना था,
पिता के घुटने, इसी में जवाब दे गये।

नुमाइश करने से चाहत नही बढ़ जाती,
मुहब्बत वो भी करते है जो इजहार तक नही करते।

रास्ते जुदा होने से अहसास मिटा नहीँ करते,
हमतब भी महकेंगे जब मौसम पतझड़ के होंगे।

हम सादगी में झुक क्या गए,
लोगों ने समझा हमारा दौर ही खत्म हो गया।

वो किताब लौटाने का बहाना तो लाखों में था,
लोग ढुँढते रहें सबूत, पैग़ाम तो आँखों मे था।

झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम,
ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम।

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